महंत डॉ. नरेश पुरी जी महाराज के सानिध्य में संत संसद: मुख्यमंत्री ने लिया संतों का आशीर्वाद, राष्ट्र और समाज के विषयों पर हुआ व्यापक मंथन
जयपुर के दिल्ली मार्ग स्थित शिव विलास रिसॉर्ट में आयोजित भव्य संत संसद में देशभर से विभिन्न अखाड़ों के साधु-संत, महामंडलेश्वर एवं श्री महंतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह महत्वपूर्ण आयोजन महंत डॉ. नरेश पुरी जी महाराज के पावन सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जिसमें सनातन धर्म, सामाजिक समरसता और राष्ट्रवाद जैसे विषयों पर गहन चिंतन एवं विचार-विमर्श किया गया।
संत संसद में संत-महात्माओं ने धर्मसत्ता और राजसत्ता के बीच संतुलन बनाए रखने, समाज में समरसता स्थापित करने तथा युवा पीढ़ी में संस्कार निर्माण की आवश्यकता पर अपने विचार अत्यंत स्पष्टता और मुखरता से रखे। इस अवसर पर महंत डॉ. नरेश पुरी जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में समाज को संस्कारित एवं जागरूक बनाना अत्यंत आवश्यक है तथा संत समाज का कर्तव्य है कि वह युवाओं को सनातन मूल्यों से जोड़कर राष्ट्र निर्माण की दिशा में प्रेरित करे।
कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तथा वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जवाहर सिंह बेढम की विशेष उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री ने सभी संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया तथा राज्य सरकार द्वारा मंदिरों एवं गौ माता के संरक्षण और संवर्धन हेतु किए जा रहे कार्यों का विस्तृत विवरण संतजनों के समक्ष प्रस्तुत किया। संतों ने सरकार के इन कार्यों की प्रशंसा करते हुए इसे धर्म और समाज के हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस अवसर पर रवींद्र पुरी ने मुख्यमंत्री से ब्रह्मा मंदिर में महंत की नियुक्ति तथा गौ माता को “राज्य माता” का दर्जा दिए जाने की अनुशंसा की।
संत संसद का यह आयोजन केवल आध्यात्मिक मंच तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्र के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। संतों के मार्गदर्शन और विचारों ने सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रहित के लिए एक सशक्त संदेश प्रदान किया।